ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व सीईओ और प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. सुधीर मिश्रा ने कहा है कि ब्रह्मोस मिसाइल की कोई तुलना नहीं है और अब इसके न्यू जनरेशन वर्जन की मारक क्षमता और सटीकता को और अधिक बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के करियर काउंसिलिंग समारोह में बतौर मुख्य अतिथि यह बातें कहीं।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है, जिसकी रफ्तार 900 मीटर प्रति सेकंड है और यह जल, थल व नभ—तीनों जगहों से लॉन्च की जा सकती है। इसका लक्ष्य बेहद सटीक होता है और अब इसके वजन को कम करने और मारक दूरी को 300 किलोमीटर से भी ज्यादा बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाई भारत की ताकत
पाकिस्तान के साथ हालिया संघर्ष पर डॉ. मिश्रा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर कोई छोटी लड़ाई नहीं थी, इसने दुश्मन को घुटनों पर ला दिया। पाकिस्तान को भारत की ताकत का अंदाज़ा इस ऑपरेशन से हुआ। उन्होंने बताया कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने सीजफायर की गुहार लगाई थी और भारत ने उसे कुछ घंटों बाद स्वीकार किया, जिससे साफ है कि दबाव किस पर था।
ब्रह्मोस के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी मांग
डॉ. मिश्रा ने बताया कि ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस का एक संयुक्त प्रोजेक्ट है और इसे फिलीपींस को निर्यात किया जा चुका है। इसके अलावा वियतनाम, मिडिल ईस्ट और अफ्रीकी देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
ड्रोन और मिसाइल टेक्नोलॉजी में भविष्य देख रहे युवा: डॉ. घनशाला
समारोह में ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. कमल घनशाला ने कहा कि अब युवा वर्ग ड्रोन और मिसाइल टेक्नोलॉजी में अपने भविष्य की संभावनाएं तलाश रहा है। उन्होंने बताया कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जुड़ाव के कारण बीकॉम, फाइन आर्ट्स और इंग्लिश ऑनर्स जैसे विषयों के छात्र भी आईटी सेक्टर में अच्छे पद हासिल कर सकते हैं।
समारोह में छात्रों को इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, कंप्यूटर एप्लिकेशन सहित विभिन्न क्षेत्रों में करियर विकल्पों और स्टार्टअप्स के अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।