उत्तर प्रदेश के नए DGP की रेस में कौन मारेगा बाजी? इन वरिष्ठ IPS अधिकारियों पर टिकी नजरें

Race for Uttar Pradesh’s New DGP: Top IPS Officers in Contention
Nation27 | Updated on: May 13, 2025 | 3:15 pm
लखनऊ, 13 मई 2025: उत्तर प्रदेश पुलिस को जल्द ही नया मुखिया मिलने वाला है, क्योंकि वर्तमान पुलिस महानिदेशक (DGP) प्रशांत कुमार 31 मई 2025 को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। उनके कार्यकाल विस्तार की कोई संभावना नहीं दिख रही है, जिसके चलते नए DGP की नियुक्ति को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। कई वरिष्ठ IPS अधिकारी इस प्रतिष्ठित पद की रेस में शामिल हैं, और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आखिरकार किसके सिर पर यूपी पुलिस का ताज सजेगा।
रेस में शामिल प्रमुख दावेदार
उत्तर प्रदेश के नए DGP की दौड़ में कई तेज-तर्रार और अनुभवी IPS अधिकारी शामिल हैं। इनमें से कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
  1. राजीव कृष्ण (1991 बैच)
    • वर्तमान पद: उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अध्यक्ष और विजिलेंस निदेशक।
    • खासियत: हाल ही में पुलिस भर्ती परीक्षा को नकल-मुक्त और निष्पक्ष तरीके से आयोजित करवाकर राजीव कृष्ण ने खूब प्रशंसा बटोरी है। उनकी सेवानिवृत्ति में अभी चार वर्ष शेष हैं, जो उन्हें इस रेस में मजबूत दावेदार बनाता है।
    • मजबूत पक्ष: सियासी समीकरण और प्रशासनिक अनुभव उनके पक्ष में माने जा रहे हैं।
  2. दलजीत सिंह चौधरी (1990 बैच)

     

    • वर्तमान पद: सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिदेशक।
    • खासियत: अनुभवी और तेज-तर्रार अधिकारी के रूप में पहचान। उनकी सेवानिवृत्ति में छह माह से अधिक का समय बाकी है।
    • चुनौती: केंद्र में उनकी वर्तमान जिम्मेदारी उनके चयन में बाधा बन सकती है।
  3. आलोक शर्मा (1991 बैच)
    • वर्तमान पद: विशेष सुरक्षा समूह (SPG) के प्रमुख।
    • खासियत: राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था संभालने का व्यापक अनुभव। उनकी सेवानिवृत्ति में भी छह माह से अधिक समय शेष है।
    • संभावना: उनकी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति उनके चयन को प्रभावित कर सकती है, लेकिन अनुभव उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है।
  4. तिलोत्तमा वर्मा (1990 बैच)
    • वर्तमान पद: डीजी प्रशिक्षण।
    • खासियत: यदि तिलोत्तमा वर्मा को यह जिम्मेदारी मिलती है, तो वह उत्तर प्रदेश की पहली महिला DGP बनकर इतिहास रचेंगी। वह लंबे समय तक केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में भी तैनात रह चुकी हैं और प्रशासनिक अनुभव में किसी से कम नहीं हैं।
    • चुनौती: उनकी सेवानिवृत्ति में केवल छह माह बाकी हैं, जो उनके चयन में बाधा बन सकता है।
  5. एमके बसाल (1990 बैच)
    • खासियत: वरिष्ठता सूची में शामिल होने के कारण उन

       

    • की दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही है। हालांकि, उनके वर्तमान पद और कार्यकाल के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है।
  6. आदित्य मिश्रा, संदीप तालुके, और रेणुका मिश्रा
    • खासियत: ये तीनों अधिकारी भी वरिष्ठता सूची में शामिल हैं और DGP की रेस में दावेदार माने जा रहे हैं। आदित्य मिश्रा वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर ADG लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पद पर हैं, जबकि रेणुका मिश्रा डीजी भर्ती बोर्ड के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही हैं।
प्रशांत कुमार की विदाई और नई नियुक्ति की जरूरत
वर्तमान DGP प्रशांत कुमार, जो 1990 बैच के IPS अधिकारी हैं, ने अपने कार्यकाल में अपराध और माफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को लागू कर यूपी पुलिस की छवि को मजबूत किया। वह 31 मई 2025 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, उनके कार्यकाल विस्तार की संभावना नहीं है, जिसके चलते योगी सरकार को जल्द ही नया DGP नियुक्त करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, DGP की नियुक्ति कम से कम दो वर्ष के लिए होनी चाहिए, और चयन के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को वरिष्ठ IPS अधिकारियों की सूची भेजी जाती है। यूपी में पिछले तीन वर्षों से कार्यवाहक DGP नियुक्त किए जा रहे हैं, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। इस बार स्थायी DGP की नियुक्ति को लेकर सरकार पर दबाव है।
नई नियमावली के तहत, जिन अधिकारियों की सेवानिवृत्ति छह माह से कम समय में है, वे DGP की रेस से बाहर हो सकते हैं। इस कारण तिलोत्तमा वर्मा, दलजीत सिंह चौधरी, और आलोक शर्मा जैसे अधिकारियों की दावेदारी पर असमंजस बना हुआ है। वहीं, राजीव कृष्ण का लंबा कार्यकाल और हालिया उपलब्धियां उन्हें इस रेस में सबसे आगे रखती हैं
इस रेस में सबसे रोमांचक संभावना है तिलोत्तमा वर्मा की, जो यूपी की पहली महिला DGP बन सकती हैं। उनके पास CBI में लंबा अनुभव और प्रशिक्षण महानिदेशक के रूप में मजबूत प्रशासनिक रिकॉर्ड है। हालांकि, उनकी कम बची सेवा अवधि उनके लिए चुनौती बन सकती है।
उत्तर प्रदेश पुलिस के नए DGP का चयन न केवल पुलिस बल के लिए, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक समीकरणों के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। क्या राजीव कृष्ण अपनी प्रशासनिक कुशलता के दम पर यह पद हासिल करेंगे? क्या दलजीत सिंह चौधरी या आलोक शर्मा केंद्र से लौटकर यूपी पुलिस की कमान संभालेंगे? या फिर तिलोत्तमा वर्मा इतिहास रचकर पहली महिला DGP बनेंगी? इन सवालों के जवाब के लिए सभी की नजरें योगी सरकार और UPSC के अगले कदम पर टिकी हैं।